राम प्रभू के निकट सनेही । दीन मलीन प्रनत जन नेही ।।
अघ अवगुन छमि होउ सहाई । संतोष मिलैं जेहिं श्रीरघुराई ।।

Saturday, February 14, 2026

जय जय जय श्रीराम रँगीले

।। श्रीहनुमते नमः ।।

 

जय जय जय श्रीराम रँगीले ।

अंजनासुवन केसरीनंदन श्रीहनुमान हठीले ।।१।।

 

तन मन रँगा राम रंग जाको गुनगन चरित रसीले ।

तीनकाल तिहुँलोक में ऐसा, और नहीं कोउ मीले ।।२।।

 

जाके उर आगार बसत प्रभु, रघुवर राम सजीले ।

पुलक रोमांच सुने गुनगन प्रभु, प्रेम वारि दृग गीले ।।३।।

 

रामदूत जन दीन सँभारत, नाम सुनत खल हीले ।

राम भगत समरथ सुखदायक, कौन बाँह बल तोले ।।४।।

 

राम भगति नव तरु उर रोपत, काटत कठिन करीले ।

दीन संतोष बाँह मोरी गहिए दीनन बाँहगहीले ।।५।।

 


।। जय श्रीहनुमानजी ।।

 

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