।। श्रीहनुमते
नमः ।।
जय जय जय
श्रीराम रँगीले ।
अंजनासुवन
केसरीनंदन श्रीहनुमान हठीले ।।१।।
तन मन
रँगा राम रंग जाको गुनगन चरित रसीले ।
तीनकाल
तिहुँलोक में ऐसा, और नहीं कोउ मीले ।।२।।
जाके उर
आगार बसत प्रभु, रघुवर राम सजीले ।
पुलक
रोमांच सुने गुनगन प्रभु, प्रेम वारि दृग गीले ।।३।।
रामदूत
जन दीन सँभारत, नाम सुनत खल हीले ।
राम भगत
समरथ सुखदायक, कौन बाँह बल तोले ।।४।।
राम भगति
तरु जन उर रोपत, काटत कठिन करीले ।
दीन संतोष बाँह मोरी गहिए दीनन बाँहगहीले ।।५।।
।। जय
श्रीहनुमानजी ।।
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