राम प्रभू के निकट सनेही । दीन मलीन प्रनत जन नेही ।।
अघ अवगुन छमि होउ सहाई । संतोष मिलैं जेहिं श्रीरघुराई ।।
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Tuesday, January 20, 2026

सुन्दरकाण्ड भाग-१९-सीताजी का हनुमानजी को आशीर्वाद देना

 

हनुमानजी की वाणी रामजी की भक्ति और प्रताप से तथा तेज और बल से सनी हुई थी । जिसे सुनकर माता सीता के मन में बहुत संतोष हुआ । और हनुमानजी को राम जी का प्रिय जानकर सीताजी ने आशीर्वाद दिया कि हे तात ! आप बल और शील के भंडार हो जाओ ।

         

 सीताजी ने कहा कि हे पुत्र आप अजर और अमर हो जाओ तथा गुणों के भंडार हो जाओ । अर्थात आपको बुढ़ापा और मृत्यु कभी सपर्श न करे (हनुमानजी महाराज को बुढ़ापा स्पर्श नहीं कर सकती, वे हमेशा युवा ही रहते हैं । इसलिए हनुमानजी के युवा स्वरूप का ही पूजन करना चाहिए । और युवा स्वरूप का चित्र आदि घर में रखना चाहिए ) । सीताजी ने आगे कहा कि आप पर रामजी बहुत कृपा करें ।

 

  हनुमानजी महाराज जैसे संत को, भक्त को रामजी की कृपा ही चाहिए होती है । इसलिए बल, शील के भंडार होने का वरदान सुनकर हनुमानजी को ज्यादा प्रसन्नता नहीं हुई । इसी तरह अजर, अमर और गुणनिधि होने का वरदान सुनकर भी ज्यादा प्रसन्नता नहीं हुई ।

 

  लेकिन रामजी आप पर कृपा करें यह वरदान कान से सुनते ही हनुमानजी पूर्ण प्रेम में मग्न हो गए । हनुमानजी ने बार-बार सीताजी को प्रणाम किया-शीश नवाया और हाथ जोड़कर बोले कि हे माता अब मैं कृतार्थ हो गया । आपका आशीर्वाद अमोघ है । अर्थात कभी निष्फल नहीं हो सकता । यह बाद प्रसिद्ध है यानी हर कोई इसे जानता है ।

 

  रामजी बहुत कृपा करें ऐसा अमोघ आशीर्वाद जिसे मिल जाय उसके लिए फिर क्या शेष रह जाता है ? रामजी की कृपा के लिए ही लोग नाना जतन करते हैं । घर छोड़कर विरागी बनते हैं । जप-तप करते हैं । सच में जीवन का अभीष्ट यही है कि रामजी की कृपा हो जाए । जिस पर रामजी की कृपा हो जाती है उसे सभी साधु-सुर-सज्जन की कृपा प्राप्ति हो जाती है । जिस पर रामजी कृपा करते हैं उससे कभी भी मुँह नहीं फेरते ।

 

   जिस पर राम जी की कृपा हो जाती है उस पर राम जी कृपा कभी कम नहीं करते । उत्तरोत्तर उनकी कृपा उस पर बढ़ती ही जाती है-‘जासु कृपा नहि कृपा अघाती’ । ऐसा राम जी का स्वभाव है ।

 

चूँकि राम जी की कृपा ही जीवन का लक्ष्य है । और इसे प्राप्त करने के बाद कुछ भी पाना शेष नहीं रह जाता इसलिए हनुमानजी महाराज को यह आशीर्वाद (तीन आशीर्वादों में से तीसरा-१. बल और शील का भंडार हो जाइए, २. अजर, अमर और गुणनिधि हो जाइए, ३. रामजी आप पर बहुत कृपा करें ) बहुत भाया कि राम जी आप पर बहुत कृपा करें ।

 

। जय श्रीसीताराम 

। जय श्रीहनुमान 

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