राम प्रभू के निकट सनेही । दीन मलीन प्रनत जन नेही ।।
अघ अवगुन छमि होउ सहाई । संतोष मिलैं जेहिं श्रीरघुराई ।।

Monday, March 2, 2026

सुंदरकाण्ड भाग-२२- हनुमानजी का रावण के प्रश्नों का उत्तर देना- राम जी की महिमा का वर्णन

 हनुमानजी को देखकर रावण दुर्वचन कहकर जोर से हँसा ।  फिर अपने पुत्र अक्ष कुमार के बध की बात स्मरण में आते ही उसके ह्रदय में दुःख उत्पन्न हुआ । रावण ने हनुमानजी से कहा कि हे बंदर तुम कौन हो ? और किसके बल से वन को उजाड़कर नष्ट कर डाला है । मूर्ख तूँ बहुत निडर दिखलाई पड़ रहा है । लगता है तुमने अपने कानों से मेरे बारे में सुना नहीं है । तुमने किस अपराध से राक्षसों का बध किया है । हे मूर्ख बता कि क्या तुझे अपने प्राणों का भय नहीं है ।

  हनुमानजी महाराज ने कहा कि हे रावण सुनों जिनका बल पाकर माया समस्त व्रह्मान्डों की रचना करती है ।

 हे रावण जिनके  बल से  व्रह्मा जी सृष्टि की रचना, विष्णुजी सृष्टि का पालन और शंकर जी सृष्टि का संहार करते हैं । जिनके बल से सहस्त्र मुख वाले शेष जी वन, पर्वत सहित समस्त व्रह्मान्डों को अपने सिर पर धारण करते हैं ।

हनुमान जी ने आगे कहा कि जो तुम जैसे मूर्खों को शिक्षा देने के लिए और देवताओं की रक्षा करने के लिए नाना शरीर (अवतार) धारण करते हैं ।

                    

जिन्होंने भगवान शंकर के कठोर धनुष को तोड़कर उसके साथ राजाओं के दल का मद चूर्ण कर दिया है । और जिन्होंने खर, दूषण, त्रिसरा अरु बालि, जो सबके सब बहुत ही बलशाली थे, का बध कर दिया है । जिनके लेशमात्र बल से तुमने सम्पूर्ण चराचर जगत को जीति लिया है मैं उन्ही भगवान राम का दूत हूँ जिनकी प्रिय पत्नी को तुम हरण करके ले आये हो ।

 

 इस प्रकार हनुमान जी महाराज ने रावण की सभा में रावण द्वारा पूछे गए पहले प्रश्न का इतना बड़ा उत्तर दिया ।

पहला प्रश्न यही था कि हे वानर तुम कौन हो और किसके बल से हमारी वाटिका को तहस-नहस कर दिया है ।

 

  हनुमानजी महाराज ने बताया कि इस समस्त संसार में एक मात्र मेरे प्रभु राम का ही बल है । जो बल व्रह्मा, शिव और नारायण में है वह भी मेरे स्वामी का ही है । शेष नाग में भी मेरे स्वामी का ही बल है । सबमें मेरे स्वामी का ही बल है । यहाँ तक जो लेशमात्र बल तुममें है वह भी मेरे स्वामी का है । अर्थात तुम पूछ रहे हो कि किसके बल से मैंने तुम्हारी वाटिका को उजाड़ा है । तो सुनों जिसके बल से सब में कुछ करने की शक्ति आती है मैं उन्हीं भगवान राम का दूत हूँ जिनकी प्रिय पत्नी का तुमने धोखे से हरण कर लिया है ।

 

                                 ।। जय श्रीसीताराम ।।

विशेष पोस्ट

सुंदरकाण्ड भाग-२२- हनुमानजी का रावण के प्रश्नों का उत्तर देना- राम जी की महिमा का वर्णन

  हनुमानजी को देखकर रावण दुर्वचन कहकर जोर से हँसा ।   फिर अपने पुत्र अक्ष कुमार के बध की बात स्मरण में आते ही उसके ह्रदय में दुःख उत्पन्न हु...

लोकप्रिय पोस्ट

कुछ पुरानी पोस्ट

Labels

LNKA pvn अंगदजी अंजना माता अंजना सुवन अंजनानंदवर्धन अद्वितीय अध्ययन अमरावती अयोध्या अशोक वाटिका अशोकवाटिका अशोका वाटिका अश्वनीकुमार असंभव संभव हो जाता है आत्मा आत्मा का विज्ञान आत्मा क्या है आदित्य इन्द्रदेव उपदेश उपनिषद ऋतु ऋष्यमूक पर्वत कपि केसरी कष्ट काकभुसुंडि JII किरात किष्किंधा किष्किन्धा केवट केसरी जी केसरी नंदन केसरीजी केसरीनंदन कोल क्षण गंधमादन पर्वत गरुण जी गीत गुरू गुरू दक्षिणा चौराहा जटायुजी जल जामवंतजी जामवन्तजी जीव ज्ञान त्रिजटा दिवस दीन दीनबंधु देवगण धैर्य निमेश पढ़ाई परमात्मा परीक्षा पर्वत पवन देव पवनजी पवनतनय पवनदेव पाठ पार्वती पार्वतीजी पुण्य पूँछ प्रश्न फल बजरंगबली बंदर बल बालाजी ब्रह्मा जी भक्त भक्ति yog भक्ति योग भगवान भगवान राम का विश्वरूप भगवान श्रीराम भालू भील भेद मतंग मुनि मन्वंतर महात्म्य महावीर माया मित्र मुंदरी मुहूर्त मैनाक पर्वत मोक्ष यमदेव युद्ध योग राम राम दूत राम महिमा राम रँगीले रामकाज रामजी रावण राहु माता लंका लंका. भोगावती लंकिनी लक्ष्मणजी लक्ष्मी लोक वक्ता वरदान वानर विद्या विभीषणजी वियोग विराट स्वरूप विश्राम वेद शंकर जी शंकरजी शास्त्र शिक्षा शिव भगवान शिष्य श्रीराम श्रीराम गीता श्रीरामजी श्रीहनुमान श्रोता सचिव सड़क सत्संग की महिमा संदेश सनातन संपातीजी समुद्र समुंद्र सरस्वती संवाद सांख्ययोग सावित्री सिंहिका सीताजी सीताजी की खोज सीतारामजी सुख सुग्रीव जी सुग्रीवजी सुंदरकाण्ड सुन्दरकाण्ड सुमेरु पर्वत सुरसा सूर्य देव सूर्य देव जी सूर्यदेव सेवक सेवक सुखदायक स्तुति स्वप्न स्वर्ग स्वामी हनुमान हनुमान जयंती हनुमान जी हनुमानji हनुमानजी हनुमानजी के गुरू