राम प्रभू के निकट सनेही । दीन मलीन प्रनत जन नेही ।।
अघ अवगुन छमि होउ सहाई । संतोष मिलैं जेहिं श्रीरघुराई ।।

Saturday, May 2, 2026

सुंदरकाण्ड-२४- हनुमान जी का रामजी के शरण में जाने के लिए रावण को समझाना

 

हनुमानजी महाराज ने रावण से कहा कि हे रावण मैं हाथ जोड़कर तुमसे विनती कर रहा हूँ कि तुम अभिमान को छोड़कर मेरी सीख को सुन लो । तुम बिचार करके अपने कुल को देखो और भ्रम को छोड़कर भक्तों के भय को हरने वाले भगवान श्रीराम का भजन करो । रावण का कुल बहुत ही उत्तम था । इसके कुल में सब भगवान का भजन करने वाले थे । इसलिए हनुमान जी ने कहा कि तुम भी अपनी कुल परंपरा के अनुसार भगवान का भजन करो ।

 

हनुमानजी ने कहा कि काल देवता, राक्षस और चर-अचर सबको खा जाता है । अर्थात कोई और कुछ भी ऐसा नहीं है जो काल का ग्रास न बनता हो । लेकिन यह काल भी जिसके डर से बहुत डरता है उन भगवान श्रीराम से किसी भी स्थिति में बैर मत करो । और मेरे कहने से जनकसुता सीताजी को वापस कर दो ।

 

देवताओं की आयु बहुत अधिक होती है । इसलिए ही उन्हें अमर कहा जाता है । लेकिन वस्तुतः वे अमर नहीं हैं । इस संसार में कोई भी अविनाशी नहीं है । एक न एक दिन सबका विनाश होता है । केवल और केवल एकमात्र भगवान ही अविनाशी हैं । इस प्रकार काल सबको खा जाता है-

राजा रंक मुरख निपुन ऋषि महर्षि सब देव ।

रामदास मरने चले बचा नहि जग केव ।।

 

हनुमानजी ने रावण से कहा कि करुणा के सागर खरारि भगवान श्रीराम शरण में आए हुए का पालन करने वाले हैं । अर्थात जो कोई भी उनकी शरण में जाता है उसे वे ठुकुराते नहीं हैं । अपना लेते हैं और उसका हर तरह से पालन करते हैं । इसलिय तुम भी भगवान श्रीराम के शरण में चले जाओ । शरण में जाने से तुम्हारे सारे अपराधों को छमा करके तुम्हें अपना लेंगे । अपनी शरण में रख लेंगे ।

 

   रामजी शरण में आए हुए जन का अपराध नहीं देखते हैं । उसके सारे अपराध को छमा करके निर्भय कर देते हैं और रख लेते हैं । इतना ही नहीं सदा-सदा के लिए रख लेते हैं । जिसको एक बार अपना कह दिया । उसे कभी नहीं छोड़ते । किसी भी स्थिति और परिस्थिति में नहीं छोड़ते । यह भगवान श्रीराम का वाना-स्वभाव है ।


। जय श्रीराम 

 । जय श्रीहनुमान 

 

 

 

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